
“अनमोल ….
सुमित ….ये….ये तो वो लड़की नहीं लग रही जो तुमने पहले हमें व्हाट्सएप पर दिखाई थी मोहनबाबू ने अपने बेटे सुमित से आश्चर्यजनक नजरें लिए पूछा जोकि अभी दिल्ली से मुम्बई अपने बेटे के बुलावे पर आएं थे सुमित ने उन्हें बताया था कि उसने सगाई करने का फैसला कर लिया है पापा मम्मी आप दोनों यहां आ जाइए
मोहनबाबू और सुधा दोनों ही कबसे उसे कह रहे थे कि तुम अब अच्छी नौकरी पर हो अब अपनी गृहस्थी बसा लो सुमित ने बीते कुछ महीने पहले उन्हें बताया था कि उसने अपने ही आफिस की एक लड़की सुमन को अपने जीवनसाथी के रूप में चुन लिया है दोनों आफिस के कयी प्रोजेक्ट एकसाथ कर रहे हैं इसलिए दोनों में अच्छी बांडिग हो गई है और उसने सुमन की कुछ पिक्चर भी भेजी थी जो मोहनबाबू और सुधा दोनों को बेहद पसंद आई थी फिर वीडियो काल पर भी बातचीत हुई थी मगर आज जो पिक्चर सुमित दिखा रहा था वो तो किसी दूसरी लड़की की थी जिससे वो सगाई कर रहा है
सुमित मोहनबाबू के सवाल पर गुस्से से बोला …वो लड़की ठीक नहीं थी पापा … इसलिए मैंने उसे छोड़ दिया
सही नहीं थी मतलब … सुधा ने हैरानी से पूछा
मम्मी बस छोड़िए इस बात को
नहीं … ऐसे कैसे छोड़ दूं … हमने उससे बात की थी बहुत सभ्य संस्कारी लग रही थी उसकी सादगी मेरे मन में बस गयी थी मुझे तुमपे तुम्हारी पसंद पर गर्व हो रहा था और अब तुम उसे ठीक नहीं थी …साफ साफ बताओ आखिर बात क्या है
मम्मी पापा …वो मेरे ही आफिस में काम करती थी हमारी बनती भी अच्छी थी मगर पापा मैं जब भी उससे अकेले में कहीं बाहर चलने के लिए कहता तो उसका जबाव होता तुम एकबार मेरे पापा से मिल लो वो तुम्हे अवश्य पसंद करेंगे क्योंकि वो अपनी बेटी पर पूरी तरह भरोसा करते हैं उनकी परमिशन मिल जाएगी तो तुम जहां कहोगे वहां चलूंगी
तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है सुमन
सुमित … मुझे खुद पर भरोसा है मगर मेरे पापा … उन्होंने मुझे मेरी हर इच्छा को पूरी करने का हक दिया मुझे पढ़ना था उन्होंने मुझे मेरी इच्छा अनुसार पढ़ाया नौकरी करनी थी उन्होंने मना नहीं किया जो पिता अपनी बेटी पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं तुम चाहते हो में उनका भरोसा तोड़ दूं नहीं कभी नहीं …और मुझे तुम्हारी मम्मी पापा से मिलने में बात करने में कोई हिचक नहीं है तो तुम कयुं पीछे भाग रहे हो आखिर मिल लो यकीन मानो वो तुम्हे निराश नहीं करेंगे में जानती हूं अपने पापा को उन्हें अपनी बेटी के निर्णय पर भरोसा है
तुम पागल हो आज जहां लड़का लड़की लिव इन रिलेशनशिप में अकेले रहने से भी संकोच नहीं करते वहां तुम मुझसे अकेले मिलने के लिए परमिशन लेना चाहती हो देखो सुमन शादी से पहले हमें एक दूसरे को अकेले में साथ रहकर अपनी कम्फर्ट जोन देखना चाहिए कल को कोई परेशानी ना हो मतलब हमें एक दूसरे के साथ अधिक समय बीताना चाहिए और आफिस के कारण हम एक दूसरे को उतना समय नहीं दे सकते समझने की कोशिश क्यों नहीं करती अपने पापा को बहाना बना कर कहो फ्रेंड की शादी है या कुछ और और फिर हम दोनों बाहर किसी हिल स्टेशन चलते हैं मौजमस्ती करते हैं
पापा थप्पड़ मार दिया उसने मुझे …और कहा मैं बहुत ग़लत थी अच्छा हुआ जो मैंने तुम्हें अपने पापा से नहीं मिलवाया वरना जिंदगी भर अफसोस रहता गुडबाय मिस्टर सुमित …
मैंने कहा… तुम भूल कर रही हो तुम जैसी हजारों लड़कियां मुझ जैसे लड़के से शादी करने के लिए तैयार बैठी है जो अपने मां बाप का इकलौता है अच्छा खासा जमीन पैसा नौकरी है जिसके पास …
मगर वो रुकी नहीं …तब मैंने नीलम के साथ दोस्ती की पापा इसके पापा बहुत बड़े बिजनेसमैन हैं लाखों का टर्नओवर है मेरी किस्मत चमक गई पापा इसलिए मैंने नीलम से शादी करने का फैसला कर लिया
लाखों के चक्कर में अनमोल हीरे को गंवा दिया तुमने सुमित … कहते हुए मोहनबाबू धम्म से सोफे पर बैठ गए
अनमोल हीरा … क्या मतलब है आपका पापा
सुमित … सुमन अनमोल हीरा है और तुमने उस अनमोल उपहार जोकि ईश्वर ने ना जाने कैसे तुम्हारी झोली में डाल दिया था तुमने उस हीरे का अपमान किया …कल तक हमें तुमपे गर्व महसूस हो रहा था मगर आज तुमपे गुस्सा आ रहा है वेबाकूफ कभी सोचा है जो लड़की एक बेटी होकर अपने पिता के प्रति पूर्ण रुप से ईमानदार रही वफादार रही वो पत्नी बनकर कितनी ईमानदारी से तेरे साथ जीवन की गाड़ी पार करवाती अबे नालायक वो अनमोल हीरा है
जीवन में ये धन दौलत काम नहीं आती जब तुम अकेले पड़ जाओगे ये दुनिया एक तरफ हो जाएं तब ऐसी पत्नियां ही एक टूटे हुए पुरुष का सहारा बनती है और वो सहारा वो कंधा जिसके पास होता है ना वो कभी भी नहीं हारता जैसे तेरी मां …. बुरे हालात में भी मेरे साथ खड़ी रही आज जो में जिस भी मुकाम को छू पाया वो कामयाबी मेरी अकेले की नहीं बल्कि इसकी है ये कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हुई थी मेरे साथ तुझे भी एक कामयाब इंसान बनाने में यही जीतोड़ मेहनत करती रही मगर आज तुमने वो किया जिसके कारण हमारा सिर शर्म से झुक गया में पूछता हूं कल तुम भी किसी बेटी के बाप बनोगे क्या तुम चाहोगे की तुम्हारी बेटी वहीं सब करें तुम्हारे भरोसे को तोड़ कर अपने प्यार को तवज्जो दें
कहो … मोहनबाबू की बातें सुनकर सुमित का सिर शर्म से झुक गया वो रोते हुए बोला … मुझसे गलती हो गई पापा मुझसे गलती … मैं अब क्या करुं
अगर तुम्हें सचमुच अपनी ग़लती का एहसास है तो तुरंत सुमन और उसके पापा के पास जाकर माफी मांगो
जी पापा कहते हुए सुमित सुमन के घर की और बढ़ गया
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