मेरा एक संस्मरण जो अभी मुझे याद आया

मैं अपनी दादी के साथ कभी कभी गर्मी की छुट्टी मे गाँव मे रहती थी मेरे चचेरे भाई बहने भी वहां रहते थे

हमलोग रोज शाम को खेलते थे दादी खाना बनाती थी

वे रोटी सब्जी और दुध हम लोगों को देती थी

एक सब्जी रोज हम लोग नहीं खाते थे वही सब्जी जो खेत या घरों के सामने उगाई जाती थी वही मिलती थी जेसे कद्दू, लौकी, taroi, गाय भैंसों का दुध, माखन, ghee जो घर मे बनता था वही हम लोग खाते थे

कभी कभी रात को दुध की लस्सी दादी देती थी

दोपहर मे राब का शर्बत मिलता था

कभी कभी दादी बीमार हो जाती थी तब चाची के घर से खाना आ जाता था और हम खा लेते थे

पूरा गाँव हरा भरा था चारो तरफ हरियाली थी

कुएं का पानी पीते थे

एक दिन मैंने देखा कि गांव मे कुछ लोग पेट दर्द का शिकार हो गए

कई लोग अपने पेट को पकड़े हुए है और खाना नहीं खा रहे हैं कुछ लोग बैलगाड़ी और घोड़ा गाड़ी से सरकारी अस्पतालों की ओर जा रहे थे

और मैंने देखा कि गाँव के कुछ लोग चादर मे लिपटे हुए घर के बाहर जमीन मे पड़े हुए हैं उन्हें परिजन रो रहे थे कि अचानक पेट मे दर्द हुआ और वे तीन दिन मे ही खत्म हो गए

चारो तरफ जेसे माहौल ही खराब हो गया था

मेरे दो दोस्त भी अपने घर के पास चादर में लिपटे घर के बाहर पड़े हुए थे

मैं छोटी थी कुछ समझ नहीं पा रही

अचानक दादी ने मुझसे कहा कि यहां पर हैजा हो गया है तुम इधर उधर मत घूमने ज़ाया करो मेरे पास ही सब लोग रहो और मैंने देखा कि पीछे वाले घर मे भी किसी का पेट दर्द कर रहा था और वो भी उल्टी और दस्त से परेशान थे

गांव मे इतनी सुविधा नहीं थी कि लोग अपना इलाज सही तरीके से कर सके

मेरे fufa जी को खबर लग चुकी थी उनका गाँव पास मे था वे अपने साथ अपने मित्रों को लेकर आए और मुझे और दादी को ले जाने के लिए कहा उनके बच्चे भी वही पर हमारे साथ ही थे

हम लोग 5 बच्चे वहाँ पर आए हुए थे और दादी के साथ रह रहे थे

फुहार जी देर न करते हुए एक घोड़ा गाड़ी मे हम सबको स्टेशन ले गए और हम सबको घर पहुंचाया रास्ते मे मेरी भी तबीयत खराब हो गई थी उन्होंने मुझे तुरंत एक अस्पताल मे भर्ती कर दिया

मेरे भाई बहन नहीं आए थे वे गांव मे नहीं रहते थे

मेरे पापा थोड़ी देर मे आए और हम सारे बच्चे बीमार हो गए थे सबका इलाज हुआ सब बच गए

जब हम लोग घर आए तो पता चला कि दादी की हालत बहुत खराब हो गई थी 10 दिन तक वो अस्पताल मे भर्ती रही लेकिन उनकी जान बच गई

गाँव मे हैजा फैल गया था और हमे पता चला कि कई लोग मर चुके थे डॉक्टर की एक टीम वहां पहुंची थी

सब लोग अस्पताल में भर्ती थे सभी के घरों मे ताले बंद थे

पूरा गाँव खाली हो गया था

सबके जानवर खेतों मे खुले घूम रहे थे

हैजा क्यों फैला था

बहुत ही गर्मी थी लोग गन्दा पानी पीने लगे थे

बरसात भी नहीं हो रही थी

आप तो जानते हैं कि गाँव के लोग अभावों मे रहते हैं उनके पास दवाईयां भी नहीं रहती है वे पढ़े लिखे भी नहीं होते हैं

पता चला कि गाँव मे एक ठाकुर साहब के यहां शादी थी

पूरे गाँव के लोग उसमे खाने गए थे

पूरी, सब्जी और मिठाइयाँ बनी थी

मेरी दादी अकेली थी वे हम सबको नहीं ले गई थी खुद चली गई थी जो लोग नहीं जा पाएं वे बच गए जो गए वे चपेट मे आ गए गन्दा पानी पी लिया। सबको हैजा हुआ।

🫢🫢🫢

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