आहत भाग 170

वो आदमी दीपेन्द्र को जबरदस्ती वहां से निकलवाने के लिए बहुत डराता है परंतु दीपेन्द्र वहाँ से नहीं जाता है

वो दरबान था वो गेट के बाहर ही रहता था रात मे वो अपने घर चला जाता था

वो उस कब्रिस्तान में दरबान था

दरबान के चले जाते ही दीपेन्द्र एक बड़ी सी कब्र खोजता है

उस पर लेट जाता है

कहता है कि कितनी आराम

कितनी शांति

उफ्फ काश मुझे भी मिल जाती

बहुत ही सुंदर

चारो तरफ पेंड है

लेकिन वो देखता है कि एक बुढ़िया वहाँ पर घूम रही थी

ये बुढ़िया यहां क्या कर रही है वो छुपा लेता है अपने आपको एक कब्र के नीचे

बुढ़िया एक खुदाई करने के लिए कुछ हाथ मे नुकीली चीज लिए हुए थी

लेकिन वो कुछ नहीं कह सकता था

फिर वो देखता है कि वो बुढ़िया चुप चाप वहीँ पर बैठ जाती है और कुछ बोलने लगती है देखने में वो पागल लगती है

वो भी वही पर अपनी जगह मे लेट जाता है

वो देखता है कि आँधी आने वाली थी

धूल का एक गुबार आ रहा था

दीपेन्द्र तुरंत समझ गया कि अब आँधी आने वाली है

अब वो थोड़ी दूर ही एक कमरा जैसा बना हुआ था वो उसमे ही दौड़ कर घुस जाता है

क्रमशः

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