
जहाँ आत्मसम्मान न हो
जहाँ शर्म लिहाज ना हो
जहाँ संस्कृति न हो
जहाँ न्याय ना हो
जहाँ स्वार्थ हो
जहाँ केवल सपने हो वो भी निराधार
जहाँ एक एसा कोई न हो जिससे अपना दर्द बांटा जा सके
मैं अकेली रहना पसंद करती हू
जहाँ भावनाओं की कदर ना हो

जहाँ आत्मसम्मान न हो
जहाँ शर्म लिहाज ना हो
जहाँ संस्कृति न हो
जहाँ न्याय ना हो
जहाँ स्वार्थ हो
जहाँ केवल सपने हो वो भी निराधार
जहाँ एक एसा कोई न हो जिससे अपना दर्द बांटा जा सके
मैं अकेली रहना पसंद करती हू
जहाँ भावनाओं की कदर ना हो
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