मैं अपनी सहेली के घर बहुत दिनों बाद गई थी उसका घर मेरे पुराने घर के पास ही था
मैं बहुत सालो के बाद अपने पापा के साथ वहा से गुजरी तो पापा ने कहा कि तुम्हारी सहेली शायद आई होगी चलो उससे भी मिल लो वो भी साल में एक बार ही आ पाती है तुम्हारे बारे में मुझसे पुंछ रही थी उस समय तुम कोलकाता मे थी
मैंने कहा कि चलो पापा उसके घर
मैं उन्हीं गालियों गुजरी
जिन गालियों मे मैं अपने दोस्तों के साथ खेलती थी
हम लोग लुकाछिपी के खेल खेलते थे
गेंद खेलते थे
गुड़िया की शादी करते थे
रस्सी कूदने थे
साइकिल चलाते थे
मैने अपने पुराने दिनों को याद कर रही थी
मैंने देखा कि गुड़िया का घर टूट गया था
उसकी दादी का देहांत हो गया था
उसके दादा जी बहुत बीमार थे
गुड़िया वहीँ पर थी मैं उसके घर से गूजर रही थी तो उसके भाई ने मुझे वहां से जाते हुए देख लिया और गुड़िया भी भागती हुई वहाँ आई और मुझसे बोलती पिंकी क्या तुम मुझे भूल गई है
ये वही गुड़िया थी जो मुझे गालियां देती थी मेरी उससे रोज लड़ाई-झगड़े हुआ करते थे हम दोनों की बहुत लड़ाई-झगड़े हुआ करते थे एक दूसरे को खूब मारते थे हम दोनों
आज गुड़िया के तीनों बच्चे भी बड़े हो गए थे
गुड़िया ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा चले घर अब नहीं मारेंगे तुम्हें तुम भी मुझे मत मारना
हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए और रुआँसी हो गई
गुड़िया ने कहा देखो मेरे दादा जी बीमार हैं 95 साल के हैं जाने के इंतजार में हैं
गुड़िया के पापा भी चल बसे थे गुड़िया के भाई दूसरे शहरों मे जॉब करते थे
गुड़िया वहां आती थी और अपने दादा जी की देखरेख करती थी
गुड़िया ने कहा कि हम कितना झगड़ा करते थे पिंकी
मैंने कहा वो सब बातें पुरानी हो गई अब उनका कोई काम नहीं
फिर उसने मुझे खूब बढ़िया कॉफी बनाई हम बात करते रहे
तभी गुड़िया ने कहा कि तुम्हारी सहेली मंजू अभी घर मे है परसों वो चली जाएगी
और हम मंजू के घर की तरफ निकलने लगे
तभी देखा कि बिट्टू के घर मे रोना पीटना लगा था
अब हम वहां भी गए तो देखा उसके बड़े भैया खत्म हो गए
ओह……मंजू वहीँ पर मिल गई और अब वो हंस नहीं सकती थी क्युकी जो मरे थे वे मंजू के मामाजी थे
मंजू मुझे देखकर उठ कर खड़ी हुई और मुझे एक अलग जगह पर ले गई बोली कि मैं अपनी खुशी व्यक्त ना कर सकीं आज कितने सालो बाद मिले है और तुम आई भी तो इस समय
मैंने कहा कि तुमसे मिलना ही काफी है ये दुख की घड़ी है जाओ तुम अपने परिवार को देखो
मैं पापा के साथ थोड़ी देर तक वहाँ रुकी और मामा की याद करने लगी वे दरोगा थे
अपनी मोटेर साइकिल मे सबको बिठा लेते थे सारे बच्चे उनका पेट और कपड़े पकड़ कर चिपक कर बैठकर उनके साथ मोटरबाइक मे घूमते थे और हल्ला मचाते थे
आज वो मामाजी भी नहीं रहे
थोड़ी देर के बाद मैं पापा के साथ अपने घर को चलने लगी
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