दीपेन्द्र अंदर घुसते ही एक मुलायम सी चीज को स्पर्श करता है अंदर बिल्कुल अंधेरा होता है उसे कुछ दिखता ही नहीं है और वो और भी अंदर जाने लगता है
उस घर के अंदर कुछ साँसों की आवाज सुनाई दे रही थी
ऐसा लगता था कि जैसे कोई साँस ले रहा हो
वो उस तरफ बढ़ता जा रहा था जहां से साँसों की अवाज आ रही थी
आखिर वो उस तरफ बढ़ ही चुका था
उसने उस वस्तु को छुआ
उसे एसा लगता था कि किसी ने उसे जबरन बांध कर रखा था उसे
फिर उसने उसका कपड़ा हटाया
तो उसे लगा कि शायद ये किसी कि लाश होगी
मगर एक लाश साँस नहीं ले सकती ये तो कोई जीवित इंसान लगता है
और वो उसे अंधेरे में टटोलते हुए उसके मुह तक जा पहुंचा
उसके मुह मे कपड़ा ठूंस दिया था किसी ने
खैर उसने उसका कपड़ा निकाला जो उसके मुह मे फंसा हुआ था
तभी उसमे से एक लड़की की आवाज सुनाई पड़ती है
मेरे हाथ खोल दो अब मुझे आजाद करो जल्दी वर्ना वो आदमी आ जाएगा
उसके साथ और भी आदमी है
दीपेन्द्र कहता है कि कौन हो तुम
क्रमशः

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