हर कर्म सोंच समझ कर करने की सोच किसी के पास नहीं होती वे बहुत कम लोग होते हैं जो किसी भी कर्म को करने के लिए कई बार सोंचते है
कुछ कर्म करके लोग पछताने के बाद भी वही कर्म अपने तुच्छ सुख के लिए करते हैं
लेकिन कुछ एसा भी कर्म होता है जो पछताने के बाद और कुछ ऐसा कर्म होता हे जो हमे पछताने नहीं देता क्योंकि वो कर्म हम अपने विवेक से सोंच समझ कर करते हैं
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