आईना ऐसा ही होता है
आईने के सामने एक बार खड़ी हुई तो उसने कहा
तुम्हारा ये रूप है
तुम्हारा ये रंग है
ये होकर भी तुम्हारा नहीं
अपने इस उजले रूप को देखो अब ये ढल चुका
पल पल एक नींद मे हो तुम
चिर नींद बस बाकी है
देखो खो जाना है एक ढूंढ मे तुमको
ना रहेगी मेरी मेरी सब कुछ होकर भी कुछ नहीं
ये चिंता सब बेकार है
जो होना है वो हो ही जाएगा
उस पर तुम ना सोंच करो
मैं आईना हूं सारे दिन मे एक बार मेरा अवलोकन करो
मैं भी आज तुम्हारा हू कल हो जाऊँगा किसी और का
जब तक ना तोड़े कोई मुझे मैं तुम्हें देखकर हंसता हू
तुम हंसती मैं भी हंसता
तुम रोती मैं भी रोता
मैं इंसान नहीं मैं आईना हू
✍️✍️
टिप्पणी करे