छोटी सी दुनिया थी उसकी प्यारी सी बगिया थी उसके सपनों मे था एक फूल उस फूल को उगाने के लिए वो रही थी सपनों मे झूला झूल, कितने दिन बाद खिला उसकी बगिया मे एक नन्हा सा फूल, इतराती थी वो अपना फूल देखकर, झूम जाती थी उसका रंग देखकर, नहीं ख़बर थी उसे पतझड़ की, नहीं पता था अनहोनी का, एक हाथ बढ़ा था बहुत बड़ा उसने उसके फूल को तोड़ लिया। और चला गया लेकर किसी अनजानी गली मे गुम हो गया
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