सामाजिकता के कुछ नियमो का विरोध

सामाजिक सुरक्षा के लिए समाज के नियमों का पालन तो करना ही चाहिए लेकिन वो सामाजिक नियम जो हमे पतन की ओर ले जाते हैं उनका विरोध हुआ है और आज भी लोग करते है

कुछ सामाजिक लोगों ने अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए कुछ नियम बना दिए थे जो लोगों का जीवन स्तर बहुत ही दुखद बना देते थे

बाल विवाह,,,,,,ये एक ऐसा नियम था जो बहुत ही दुखद था बाद मे ये रीति से कुरीति बन गया

जिंदगी को एक खिलौना बना कर रख दिया गया बहुत छोटे छोटे बच्चों की शादी कर दी जाती थी

बाद मे इसे खत्म करने की कोशिश की गई

सती प्रथा,,,ये भी सामाजिक कुरीति थी। इस प्रथा मे पति के मरने के बाद पत्नी को भी जबरन चिता मे जलाया जाता था ये एक प्रकार की हत्या थी

पत्नी का क्या दोष था लेकिन उसका पति उसके सामने मरा तो वो दोषी हो गई उसे भी अपने पति के साथ जलना पड़ता था

आज ये कुरीति भी खत्म हो गई

दहेज प्रथा। ये प्रथा ऐसी थी कि दुल्हन के घर से पैसा लिया जाता है वो भी मुंहमांगा

लड़की के घर से मुंहमांगा धन ना मिला तो लड़की की शादी रुक जाती थी

अगर शादी हो भी गई तो ससुराल मे तानों का सामना करना पड़ता है और तो और कहीं कहीं दहेज ना मिलने पर बहू को जान से मार डाला जाता है

कन्या भ्रूण हत्या। ये प्रथा राजस्थान मे प्रचलित थी कन्या को पेट के अंदर ही मार देते थे

और तो और अगर पेट मे नहीं तो जन्म के तुरंत बाद,बच्ची की हत्या भी कर देते थे

लेकिन आज कन्या को मारना अपराध माना गया है लेकिन बहुत से लोग अल्ट्रासाउंड करवा कर पता लगा लिया करते है और कन्या को पेट में ही मार देते है

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