असली सेवक

वो एक असली ही सेवक था जो मालिक उसे समझ नहीं पाया हमेशा उस पर शक करना उसकी एक एक बात पर नजर रखने की आदत हो गई थी

मोहन नया नया एक 20 साल का युवक काम करने आया था

परंतु मालिक की नजरों मे वह चढ़ा ही रहता

सुखबीर उसे हमेशा बुरा भला कहता लेकिन मोहन उसे कुछ ना कहता सबकुछ सुनता था क्योंकि वो बहुत गरीब था माँ बाप बूढ़े हो चुके थे बड़े भाइयों ने अपना रास्ता अलग कर लिया था वो लोग दूसरे शहर मे नौकरी करने चले गए थे बूढे माता पिता को नहीं ले गए क्योंकि वो लोग बीमार रहते थे और वे लोग किसी काम के नहीं थे

इसलिए बड़े भाई और भाभी उन लोगों को अपने साथ नहीं ले गए

लेकिन मोहन ने अपने माता पिता को नहीं छोड़ा वे उसे बहुत प्रिय थे उसे अपने माता पिता भगवान लगते थे

एक दिन सुखबीर ने मोहन को गाली देते हुए कहा कि ठीक से काम नहीं करते हो तुम

मोहन ने कहा मालिक चाय पीने चला गया था

खाना खाने चाला जाता हू मैं

सुखबीर ने कहा कि तुम अब एक बार चाय और एक बार ही खाना खाया करो काम मे देर हो जाती है

मोहन ने कहा ठीक है मालिक जैसी आपकी मर्जी

मोहन काम करता और मालिक की बात मानकर अपना समय काटता था

रात मे सब लोग काम से बाहर जा रहे थे अपने अपने घर की ओर मोहन भी अपने घर जा रहा था

रास्ते मे उसने कुछ लोगों को बातें करते हुए सुना कि वो सुखबीर बहुत धनी आदमी है उसके बेटे और बेटियाँ दूसरे शहरों मे पढ़ने जाते है

उसकी बीबी कितनी सुंदर है और वो सोने चांदी से लदी रहती है

उसके घर मे चोरी करने से कितना मालामाल हो जाएंगे हमारी सारी गरीबी दूर हो जाएगी

मोहन ने उन चोरों की बात सुन ली और वापस सुखबीर के पास चला गया और सुखबीर से बोला मालिक सावधान रहना आपके घर मे कभी भी चोरी हो सकती है

सुखबीर ने कहा कि तुम्हारी तबीयत तो ठीक है क्यों ऊल जलूल बक रहे हो तुम

मोहन ने कहा कि मैं सत्य कह रहा हू मालिक

और जाते जाते बोला कि मालिक क्या रात मे मैं आपके यहां रुक जाऊँ

सुखबीर ने कहा कि नहीं तुम घर जाओ रात का खाना खाने के लिए तुम बहाना बना रहे हो

मोहन कुछ नहीं बोला और वो अपने घर चला गया

रात मे सुखबीर ने सेवक तैनात कर दिए खुद भी रात भर नहीं सोया

तीन चार दिन और रात वो नहीं सोया

अब जब चोरी करने वाले नहीं आए तो सुखबीर ने सोंचा की मोहन पागल है और उसने मोहन को फिर से गालियां देनी शुरू कर दी और सब निश्चित हो गए और एक रात सब बेखबर होकर सो रहे थे तभी चोरों ने रात मे उनके घर मे चोरी कर ली

जब सब सुबह उठे तो देखा कि पैसा, सोना चांदी सब गायब हो गया था पुलिस को बुलाया गया

पुलिस ने कहा कि तुम्हें किसके ऊपर शक है

सुखबीर ने मोहन की तरफ उंगली उठाई और कहा कि इसने ही चोरी की होगी आप इसके घर की तलाशी लो

मोहन ने कहा कि मालिक मैंने आपको खबर दी थी कि आपके यहां चोरी होने वाली थी मैं तबसे घर ही नहीं गया था आपके खलिहान मे सो गया था भूखा प्यासा

अब पुलिस ने कहा कि मैं तुम्हारे घर की तलाशी लूँगा और वे लोग मोहन के घर की तलाशी करने चले गए और वहां से कुछ नहीं मिला अब सुखबीर मोहन को जूतों से मारने लगा तभी पुलिसकर्मी ने कहा कि मैं इससे पूछ लेता हू और सब एक कमरे मे ले जाकर मोहन से पूछते और मोहन ने सब सच सच बताया

पुलिस को कुछ लोगों पर शक हुआ और चोर पकड़े गए जेवर भी मिल गए और पैसे भी मिल गए

मोहन को छोड़ दिया गया

मोहन अपने घर जाने लगा तो सुखबीर को अपने किए पर बहुत पछताने लगा उसने मोहन पर बहुत जुल्म किए थे उसे भूखा रखा था और उस निर्दोष को मारा भी था

अब सुखबीर मोहन से माफ़ी मांगने लगा और बोला मोहन मुझे माफ़ कर दो

मोहन ने कहा मालिक अब मैं अपने घर जाऊँगा आज तो बच गया आपके घर मे अब काम नहीं करूंगा मेरे माता पिता बूढे और बीमार है अगर मुझे कुछ हो गया तो उन्हें कौन देखेगा और जाने लगा

लेकिन सुखबीर ने कहा कि तुम्हारा दो दिन का काम बाकी पाड़ा है उसे करके जाओ मैं तुम्हें नहीं रोकेगा

अब मोहन बेबस होकर काम करने लगा

परंतु वो देखता है कि मालिक कहा गए. मोहन परेशानी मे पड़ गया लेकिन वो जिम्मेदारी से अपने काम को करने लगा

रात मे भी सुखबीर नहीं आए

दो दिन तक सुखबीर नहीं आए

मालिक कहा गए होंगे लेकिन वो मुस्तैदी से सुखबीर के घर की रक्षा करता रहा

तीन दिन के बाद सुखबीर आए और मोहन से बोले कि मेरे चाची चाचा आए है उनका रहने और खाने का इंतजाम कर दिया है जाओ तुम उनसे मिल लो वो दूसरे वाले घर मे है

मोहन ने कहा मालिक मेरे ऊपर दया करो

चार दिन से मैं अपने माता-पिता से नहीं मिला पता नहीं वो किस हाल मे होंगे मुझे जाने दो

सुखबीर ने डंडा उठा लिया और कहा कि ऐसे कैसे जाओगे तुम काम पूरा करके जाने दूँगा जो कहा है वो करो अब तुम

अब मोहन भागते हुए दूसरे घर के अंदर जाता है तो देखता है उसके अम्मा, बाबु वहाँ बैठे हुए थे

मोहन खुशी से उनसे लिपट गया

और बोला आप कैसे आए यहां तो दोनों ने बताया कि वो एक सुखबीर नाम के सज्जन लाए हैं हमें

अब तो वो भागते हुए सुखबीर के पास गया और उनके पैरों मे गिर गया बोला मालिक आप देवता है

आप भगवान है

सुखबीर ने कहा कि अब तुम यही रहोगे मेरी जमीन की देखरेख तुम ही करोगे अपनी छोटी बेटी का विवाह मैं तुमसे करूंगा क्योंकि मुझे तुमसे अच्छा दामाद नहीं मिलेगा। कहानी समाप्त

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