चाँद सी हसीं चेहरे पे यूँ ही काली जुल्फें बिखराया मत कर
किसकी नज़र लग जाए हुस्न को बारिश में भिगाया मत कर।
माना तेरी चांद जैसी हसीन चेहरे के आशिकों की कमी नहीं
पर आते जाते गली में किसी को भी देख मुस्कुराया मत कर।
कोई आशिक निकले तेरे दीदार को गली से क्यों मायूस लौटे
कौन कहता है दिल लगाने को बादल में छिप जाया मत कर।
दर्द का क्या उसे जिंदगी में धूप छांव समझकर भूलना होगा
छोटी मोटी बातों में अपनी अंखियों से आंसू बहाया मत कर।
बिखरी जुल्फें कातिल अदाएं होंठो पे गजब तेरी मुस्कान है
दीवानों को चैन से रहने दे आँखों में काजल लगाया मत कर।👏✍️
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