रूपा भी चली जाती है और एक कोने मे खड़ी होकर रोने लगती है तभी रिकी आती है और रूपा से कहती है कि रूपा रोती क्यों हो रघु तुम्हें कुछ नहीं कहेगा
कोई कुछ कहकर तो देखे जरा
ज़बान काट लुंगी मैं सबकी
रूपा कहती है कि नहीं दीदी ऐसा नहीं है
मैं खुश हू बस ऐसे ही कुछ आंख भर आई
तभी प्रकाश रघु के पास जाते है और एक लोटे में पानी लेकर कहते हैं कि रघु ये पानी रूपा को दे आओ वर्ना आज रात भी वो भूखी सो जाएगी
रघु कहते हैं कि पापा क्या तीन सालो से व्रत के बाद रूपा भूखी सो जाती है मेरे लिए वो भगवान से दीर्घायु की प्रार्थना करती है और मैने उसका कितना अपमान किया
लेकिन मैं पानी देने नहीं जा सकता पापा
प्रीति कुहराम कर देगी
घर मे बहुत झगड़ा हो जाएगा पापा
अच्छा तो तुम एक काम करो ये पानी तुम छू लो या जूठा कर दो मैं रूपा को दे आता हू जाकर ताकि वो आज भूखी ना सोए। क्रमशः

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