**द्रौपदी और व्याख्याता**
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द्रौपदी! युगों युगों के बाद
कटु याद तुम्हारी आई है ।
पाँच पतियों की संयुक्त पत्नी
जीवन यापन की व्यथा कथा,
हमें आज समझ में आई है ,
द्रौपदी! युगों युगों के बाद
कटु याद तुम्हारी आई है।
पति सभी थे गुणी धीर वीर
प्रवीण , धुरंधर महा प्रतापी ।
महाविशारद, युद्ध -कला में ,
महिमामंडित _ महात्यागी।
परन्तु,
मानवीय अवगुणों से परे नहीं थे,
कुलवैभव ,लूटाने अरे हुए थे।
तूम्हे भी ,वस्तु समझ लिया था ,
द्यूतक्रीड़ा दाव पर लगा दिया था
कौरवों ने ,क्या नहीं किया था ?
यद्यपि ,
नारी सरस्वती का मूर्त रुप है ,
ममता सहिष्णुता का प्रतीक है।
पर पाँडवों ने कर दिया अन्याय,
नृप दर्प का क्या यही अभिप्राय ?
कपट समझ नहीं सका छली का
चीर हरण हो गया द्रुपद कली का ।
मदांध दुर्योधन का हैवानी- हूंकार ,
दुष्ट दुश्शासन का दानवी- दहाड़ ।
सभामध्य पितामह गमगीन हुए,
द्रोणाचार्य,कृपाचार्य शर्महीन हुए।
अस्मिता नारी की कोई बचा न पाए,
क्षत्रिय धर्म भी नाहक निभा न पाए।
तो कुरुक्षेत्र में समवेत सिंहनाद कैसा
गाण्डीव गदा पर प्रचंड प्रमाद कैसा ?
नग्न हुई ,सभा में द्रौपदी जिस दिन ,
पाण्डव पराजित,निश्चय उसी दिन ।
द्रौपदी !
तुम्हारी जैसी हीं हमसब की स्थिति ,
पीड़ा अतिदाहक ,अतिशय दुर्गति ।
पाँच पतियों के बीच दारुण दशा ,
सब पर छाया है, कूर्सी का नशा ।
सब अपनी अपनी पारी खेल रहे ,
हम अबला बन अवसाद झेल रहे।
किस किस को मनाये कौन रूठा है
सत्य सत्यवती बाँकी सब झूठा है
यू०जी०सी० सम पतिदेव युधिष्ठिर ,
नियम परिनियम का करते निर्धारण।
उसकी व्याख्या टेबुल दर टेबुल
अपने ही ढंग से होता अनुपालन ।
माना ,वह बाइबिल गीता कुरान है
पर ,देवगृह का समिधा सामान है।
माननीय न्यायपालिका गाण्डीवधारी,
पर उनकी भी कुछ अनबूझ लाचारी ।
न्यायादेश भला जब तक आता है
व्याख्याता उसके पहले मर जाता है।
मरणोपरांत होती संचिका की खोज,
संतति मनाती मस्ती मटरगश्ती मौज।
गदा गजोधर सम राज्य सरकार
लालन पालन उसका अधिकार।
इसकी निद्रा भी, अति दुखदायी
मनसा , द्रौपदी समझ न पायी।
भिन्न समय की विभिन्न कथा है
करो प्रताड़ित ,प्रचलित-प्रथा है।
पतिव्रता होती है भारतीय नारी
पति रुप परमेश्वर बेबस बेचारी ।
नकुल सदृश्य महाप्रभ महामहिम
जिनकी भूमिका होती प्रलयकारी
तेवर में तन जाए यदि भृकुटिभाल
थर्र-थर्र थर्राते ,फिरते अधिकारी।
पाँचवाँ माननीय कुलपति सहदेव
कुल के हैं दयानिधान देवाधिदेव।
अनुनय विनय, विनम्र श्रदासुमन
धूप दीप भजन कीर्तन से प्रसन्न ।
दरस गये, तो समझो बरस गये ,
फिर हो गयी मुसलाधार कृपा की।
द्रौपदी व्याख्याता में है समानता
बात यही विवेक ,लाख टके की।
अन्य पतियों से कर सकते तलाक
ज्ञान ,गदा ,गाण्डीवधारी, गोपाल ।
सहदेव हीं हैं सम्पूर्णानंद पतिदेव
रिद्धि सिद्धि दायक आनंदातिरेक।
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