जरूरी नहीं कि मुझे फ़ूलों का हार पहनाया जाए, जरूरी नहीं कि मुझे सिंहासन पर बैठाया जाए, बहुत कुछ पाने की चाह करती नहीं हू मैं, लेकिन यह जरूर चाहूँगी कि मुझे कोई समझे मैं उसे समझूँ,
मैं नहीं चाहती कि मेरा बहुत बड़ा पत्थरों से सजा आलीशान मकान हो
मैं नहीं चाहती कि भौतिक सुखों से भरा मेरा संसार हो
मैं ये चाहती हू की मेरा जीवन यापन होता रहे और सहने की शक्ति मुझे मेरी अदृश्य शक्ति से मिलता रहे
मैं नहीं करना चाहती सैर अपनी खुद की कार से मगर इतना चाहूँगी की मेरा शरीर रूपी ये नश्वर घोड़ा सफर मे चलता रहे
हम कितने बार मिले है कितनी बार बिछड़े है परंतु इतने दिन भी साथ रहे हमारा ये प्यारा सफर यूँ ही किसी स्वार्थ के चलता रहे धन्यवाद मित्रों आपका ये प्यार भरा साथ मुझे मिलता रहे
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