
क्या रखा है दूसरों के घरों मे झांकने मे लोग दूसरों के जीवन मे झांक कर मनोरंजन क्यों करते हैं ये तो मुझे पता नहीं
कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मेरे घर मे भी झांकते है और मेरी भी खबर लेना चाहते हैं
मेरी तो कोई विशेष खबर भी नहीं है मैं सबकी तरह अपने घर मे रहती हू किसी से कुछ भी नहीं बोलती जैसी भी हू अपनी कोई भी परेशानी दूसरों से नहीं बताती
लेकिन एक बात तय है कि हम जैसे रहते हैं उसी तरह की प्रकृति बन जाती है
मैं फटे कपडों मे भी रह लेती हू
ज्यादा सुख की चाह नहीं है मुझे क्योंकि मैं जानती हू की कोई चाह रखना ही मेरे कष्टों का कारण बन सकता है
लोग मुझसे बिना किसी कारण के ईर्ष्या करते हैं परंतु मैं ऐसे लोगों को क्या कहु मैं कुछ नहीं कहती और सब अंदर ही अंदर कुढ़ते रहते हैं जबकि वे सब बहुत ही धनी और संपन्न है
मै तो साधारण-सी महिला हू मित्रों
थोड़े मे ही गुजर करने वाली कुछ बचा लेती हू कल के लिए ताकि किसी से जरूरत पड़ने पर मांगना ना पड़े
😊😊😊
टिप्पणी करे