कुछ भी कठिन नहीं

करना है तो कुछ भी कर लो अब समय नहीं है आराम करने का, ये सोंच कर मत बैठो की ये कार्य कठिन है नहीं तो कुछ ना कर सकोगे,कहो अपने आप से की कुछ भी कठिन नहीं है ये ब्रम्हांड है यहां हर वस्तु सामने ही होती है पर प्रकट कब होती है जब तुम उसे खींचने की कोशिश करने लगते हो

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