दूसरों को क्रोध दिलाना भी दोष

अपने आचरण से दूसरों को कभी भी क्रोध नहीं दिलवाना चाहिए क्युकी ये भी दोष हे शब्दों का जाल तो पूरे ब्रह्माण्ड में छा जाता है और वही शब्द हमारे कर्मों के रूप में वापस आते हैं

अगर कोई आप बेवजह क्रोध करता रहता है तो उस व्यक्ति का ही दोष है

लेकिन कुछ लोगों को मैंने देखा है कि वे लोग बहुत बेशर्मी करते हैं और किसी को चिढ़ा कर या अपने कार्य कलापों से उसकी आत्मा को अशांति देने का कार्य शुरू कर देते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आत्मा मे ही परमात्मा होती है अगर उस समय उस व्यक्ति ने आपको कुछ अपशब्द या बद्दुआ दे दी तो वो निश्चय ही आप पर लगेगी और आपका भलाई नहीं हो सकती

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