निर्मोही

निर्मोही इस जीवन मे कोई नहीं बन सकता हा कुछ ही लोग ऐसे होते है जो किसी के बहुत सताए हुए होते हैं वे ही कुछ निर्मोही हो जाते है

कुछ पीड़ा लोग देते हैं जो अपने होते है ,सपनों की तो बात ना करो वे भी अपने नहीं होते है

जब अपने ही अपनों पर वार करते हैं तब भी उनसे मोह नहीं जाता

शब्दों के बाण जब इस छाती पर सीधा घुसते है तब भी मोह नहीं जाता

कितना नुकसान कर जाता है ये मोह जगत का ना मरने देता है शांति से बस तिल तिल जीवन जीने देता

निर्मोही इंसान जब होता है जब उसके अपने ही ठोकर देते हैं और समय से ही अपने विवेक से उसकी आंख खुल ज़ाया करती है

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें