॥ अध्यात्म पथ ॥
अध्यात्म कायरों और अकर्मण्यों का मार्ग नहीं अपितु कायरता और अकर्मण्यता का त्याग करने वालों का मार्ग है। अधिकांशतया लोगों की दृष्टि में अध्यात्म का मतलब सिर्फ वह मार्ग है जहाँ से कायर लोग अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहते हैं।
अध्यात्म का मतलब छोटी जिम्मेदारियों से बचना तो नहीं मगर छोटी-मोटी जिम्मेदारियों का त्यागकर एक बड़ी जिम्मेदारी उठाने का साहस करना जरूर है। अध्यात्म अगर कमजोरों का ही मार्ग होता तो फिर बालपन में ही शेर के दाँत गिन लेने की सामर्थ्य रखने वाले आचार्य महावीर और आचार्य बुद्ध जैसे लोग इस पथ से ना गुजरे होते।
स्वयं की चिंता को त्यागकर स्वयंभू (शंभू) के चिंतन का नाम ही अध्यात्म है। स्वयं के कष्टों का विस्मरण कर सृष्टि के कष्टों के निवारण की यात्रा ही वास्तविक अध्यात्मिक यात्रा है।
🫴 सन्त वाणी- ‘वत्स! महत्ता केवल दान देनेकी नहीं होती। हमने जो दान दिया है, वह किस साधना और स्त्रोत्र से प्राप्त किया है, यह भावना भी धनके साथ जुड़ जाती है। यदि तुम्हारी अनीतिकी कमाई और यदि बिना परिश्रमका पैसा पाकर व्यक्ति उसे अनीति के कार्योंमें लगा दिया और इसमें तुम्हें भी उसका भागीदार होना पड़ेगा और मेरा मेहनत का पैसा जिसके पास गया, उसने उस धनका उचित उपयोग होगा। दान करना एक पुण्य कार्य है। दान वह है, जो दानदाता विनम्र और निःस्वार्थ होकर देता है। अपने यशके लिये दिया गया दान, दान न होकर एक व्यवसाय होता है
जय श्रीं हरि 🙏🙏🌹🙏🙏
टिप्पणी करे