रंजन की बहन को एक पड़ोस का लड़के ने प्यार मे इतना पागल कर दिया कि वो रात के अंधेरे मे उसके साथ निकल गई सब सो रहे थे सुबह उठे तो नीरा वहाँ नहीं थी
अब रंजन ने उस लड़के से बदला लेने की ठान ली वो लड़के दलित था
अब वो लड़का उसकी बहन को लेकर भाग चुका था
रंजन उसके परिवार से बदला लेने की सोंचने लगा
रंजन की एक फैक्ट्री थी
उस फैक्ट्री से उसने बदला लेने के लिए सारे दलितों को निकाल दिया बिना वज़ह के जो जो उसके यहाँ काम करते थे
अब उसके बाद भी उसको शांति नहीं मिली तो उसने उसके परिवार वालों को तंग करना शुरू कर दिया
धीरू के भी दो बहने थीं
रंजन ने उन दोनों बहनो को भी बर्बाद करने की सोची कि जेसे वो उसकी बहन को भगा ले गया वैसे ही धीरू की बहनो के साथ भी होना चाहिए
और रंजन ने कुछ लड़कों को उनकी बहनो के पीछे लगा दिया
बहनें होशियार थीं वे किसी की तरफ देखती ही नहीं थीं लड़के आगे पीछे घूमते थे लेकिन उन्हें उनसे कोई मतलब ही नहीं था
अब रंजन को और भी गुस्सा आ गया उसने कहा कि तुम लोग इतने दिन तक कुछ ना कर सके
लड़के ने कहा कि वे दोनों तो किसी की तरफ देखती ही नहीं
अब रंजन ने कहा कि मैं तुम लोगों को पैसे देता हू तुम लोग रात के खेत के इनके साथ दुष्कर्म करो और वही नाले के दोनों को फेंक दो
तभी किसी ने उन दोनों बहनो को ये बाते बता दी
धीरू के परिवार वाले भी बहुत डर गए
और वो लोग अपनी बेटियों को लेकर दिन मे ही कहीं भाग गए
अब रात मे जब लड़के उनके घर मे घुसे तो उन्हें कुछ लोग सोते हुए मिलें उन लोगों देखा कि ये सब बाहर सो रहे है और उन सबको ही पकड़ लिया और दो लोगों को लड़की समझ कर पकड़ लाए खेत मे
रंजन भी वहाँ मौजूद था वो जोर जोर से पागलों की तरह चिल्ला रहा था कि बर्बाद कर दो इन दोनों को
उसमे से बंधी हुई एक महिला भी चिल्ला रही थी
जब उन लोगों ने उस महिला को खोला और दूसरा बोरा खोला तो उसमे धीरू और उसकी बहन निकली
वो लोग काम करने लगे थे दोनों ने शहर मे शादी कर ली थी और वो लोग सबसे मिलने आए थे
रंजन की बहन ने कहा कि आओ भैया लुटा दो मेरी इज़्ज़त अपने इन कुत्तों से
अब रंजन बहुत परेशान हो गया था
वो समझ नहीं पाता था कि ये कैसे हो गया
लेकिन रंजन के आदमी तो शराब के वशीभूत थे वे रंजन की बहन के कपड़े फाड़ रहे थे और जोर जोर से हंस रहे थे रंजन उन लोगों को रोक नहीं पाया
धीरू भी असफल हो गया और रंजन के सामने ही उसकी बहन का बलात्कार उसी के आदमियों ने कर ड़ाला
थोड़ी देर के बाद रंजन घायल पड़ा था धीरू को भी उसी के आदमियों ने मारा था उसकी बहन की हालत देखने योग्य नहीं थी
रंजन अपनी बहन से आंख नहीं मिला पा रहा था उसकी बहन एक गंदे नाले मे पड़ी हुई थी
बहन बेहोश थी धीरू घायल था
अब रंजन क्या करता
दूसरे दिन पुलिस आई और रंजन को पकड़ ले गई रंजन के आदमी ने सारी बात पुलिस को बता दी
रंजन की फैक्ट्री भी बंद हो गई
बहन ने भी आत्महत्या कर ली
धीरू अपने माँ बाप के पास चला गया
रंजन को जेल हो गई
रंजन के माँ बाप वहीँ पर अकेले अभाव मे रहते हुए रंजन को कोस रहे थे
रंजन ने बदला लेने के लिए कितनी मूर्खता की
बदले की आग मे इंसान खुद ही जल गया
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