वर्तमान समय इस विराट सृष्टि नाटक का सबसे महत्व पूर्ण समय है।हजारों हजार वर्षों से हमें जिस समय का इंतजार था वह यही समय है।परमात्मा पिता के अवतरण के जिस समय की महिमा सभी वेद शास्त्रों ने किया था वह यही समय है।आत्मा रूपी सीताओं (दुःखी आत्माओं) का बुराई और विकार रूपी रावण के कैद से सदा के लिए छूटने का यही समय है।रावण के दस सिर का प्रतिक5 विकार स्त्री के (काम,क्रोध, लोभ, मोह, और अहंकार ) और 5 विकार पुरुष के (काम, क्रोध,लोभ, मोह और अहंकार) है।आलस्य कुम्भकर्ण का प्रतिक हैगरजना – मेघनादकठोर स्वाभाव- खरदूषित वृति – दूषणचरित्रहीन- सरूपनखाचुगली – मंथरारावण के सभी बाल बच्चे बुराई और विकारों, ईर्ष्या, द्वेष, घृणा,नफरत,निंदा….. का प्रतिक है।मधु अर्थात मीठा ( काम ,लोभ और मोह)केटव अर्थात विकराल (क्रोध और अहंकार)चंड अर्थात अति उग्रमुण्ड अर्थात अति क्रोधीधूम्रलोचन धूम्र अर्थात धुंआ, लोचन अर्थात आँख, ईर्ष्या का प्रतिक अभी भगवान से प्रीत बुद्धि वाले पाण्डव भी है, विपरीत बुद्धि वाले कौरव भी है, और विज्ञान के घमंड में चूर अमेरिका और यूरोप वाले यादव भी है।जिन्होंने अपने पेट (बुद्धि ) से मूसल (मिसाइल) निकाला है और अपना ही सर्वनाश करने वाला है।सभी असुर बुराई और विकारों का प्रतिक है इन सभी बुराई और विकारों को अभी परमात्मा पिता की मदद से सहज ही जीत सकतें हैं।नर चाहत कुछ और है होबत कुछ और है।अभी नहीं तो कभी नहीं

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