सारे दुखों का कारण है हमारे अपने कर्म, जो हमारे हर पल का हिसाब लेते हैं, कुछ समय तो हमे लगता है कि हमे कोई भी नहीं देख सकता लेकिन प्रकृति हमारे कुछ कर्मों को देखती है और वही हमारे जीवन मे हलचल उत्पन्न करने लगते हैं
वास्तविकता यही है कि हमारे दुःख का मूल कारण, हमारे ही द्वारा किसी ना किसी जन्म में किये गए गलत कर्म है।
चाहे तन से संबन्धित समस्या है
चाहे मन से संबंधित,
चाहे धन से संबंधित,
चाहे सम्बन्ध संपर्क से ,सभी का मूल कारण हमारे द्वारा ही किये गए गलत कर्म है इसलिये कर्मो की गति को जानना अति आवश्यक है।
अगर तन से संबन्धित समस्या है तो तन को सेवा में लगाये।
अगर मन से संबन्धित है तो मन से अच्छे विचारों के प्रकम्पन्न विश्व में फैलाये।
अगर धन से संबंधित है तो आप के पास जितना ही है उसमें से कुछ हिस्सा अच्छे कार्यों में अवश्य लगायें।
अगर किसी सम्बन्ध संपर्क से संबंधित है, तो यह स्वीकार करले की किसी न किसी जन्म में, हमने भी उसे दुःख दिया है । उस भूल के लिये
मन ही मन सच्चे दिल से, आत्मिक स्वरुप में स्थित होकर ईश्वर से क्षमा मांग लें और उस व्यक्ति से भी, कुछ दिनों तक यह प्रयोग करते रहे, तो आप देखेंगे कि आपका मन हल्का हो जायेगा और आपके सम्बन्ध भी उस व्यक्ति के साथ मधुर हो जायेगा।
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