
🙏 हे परब्रह्म! हे सदाशिव ,हे मेरे प्रियतम भगवन ! मैं कितना भी मस्तमौला हो जाऊँ कितना भी ऊंचे शिखर पर पहूँच जाऊँ ।
चाहें मैं किसी भी दशा मैं रहूँ अगर आपका नाम मेरी हर धड़कन के साथ न आये तो मुझे वो सुख या दुख ना देना । बस मैं कैसा भी रहूँ हमेशा हर पल आपको निहारता रहूँ ! आपके ख्यालों में खोया रहूं जबतक आप में समा न जाऊं ,आप से मिलन ना हो जाय ! आप में समाने के बाद भी मैं आपार, अथाह, अन्नत ,भक्ति ,प्रीति शक्ति ,करुणा,दया , का अन्नत आपसे यह शोभाग्य व यश मुझे अन्नत समय प्राप्त हो । आपके द्वारा दी गई हर श्वास व हर पल का धन्यवाद करता रहूँ । एक पलक भी आपके बिना ना रहे । हे परब्रह्रा , हे सदाशिव जो सदा से विराजमान् ऐसे दीनानाथ मुझ पर कृपा बनाये रखना ।
सब मैं आपको देखू । मैं आपका हूँ आप मेरे हैं मैं आपके लिए ही हूँ। मैं आपके शरणागत हूँ । आप मुझे पकड़े रहना। मैं इस विषरूपी माया के जाल से भरा नश्वर अर्थात् जो नष्ट होने के समान हैं ! इस संसार में अपने कुकर्मों के कारण आपसे दूर होकर यहॉं आकर आकर गिर और घिर गया पुरी तरह से , है परम परमेश्वर ! अब आप ही केवल मेरे अपने हैं ! बाकी सब माया हैं, असत्य हैं , भ्रम हैं, जो मुझे आपकी ही अनुकम्पा दया व करुणा से ज्ञात हुआ हैं ! अब मैं इस संसार की मायानगरी में फंस चुका हूं ,इसके वश में हो गया हूं ! जिस प्रकार मृत शरीर धरती पर पड़ा रहता हैं ! ठीक उसी तरह मैं निर्बल होकर मृत शरीर के समान आपसे करुणा भरी पुकार कर रहा हूं ! मुझे इस मायानगरी से केवल आप ही बचा सकते हैं ,नहीं तो उस मृत शरीर के समान मेरा विनाश संभव हैं ! आपको बारम्बार करोडो. प्रणाम व दण्डवत् शुभ चरन वंदन । प्रभु आपको धन्यवाद करने के लिए मेरे पास कोई सुन्दर उपमा व शब्द न ज्ञान न विधा, न बुद्धि, कुछ भी नहीं हैं। मुझे शरण में लेकर बस इतनी सी कृपा करे की आपकी सुन्दर सी स्तुति कर सकू। यह करके आपको सदैव प्रसन्न रख सकूं ! आपके हृदय में सदा के लिए अपना स्थान बना सकूँ । यह अरदास हर पल हर घड़ी आपको करता रहूँ। बस आप मैं खो जाऊँ । आपके गुणों का निरन्तर यशगान करता रहूं ! खुद से खुद को खाली कर दूँ । आप से इतना प्यार करुं की बस आप मेरे बिना एक पल भी ना रह सको। यह सब मेरे दयालू भोलेनाथ आपकी अपार अनुपम कृपा से ही सम्भव हैं ।सबके स्वामी, भक्तों के रखवाले, दीनों के नाथ, जिनका ना कोई आदि अन्त आज तक ना जान पाया ।जो अजन्मा हैं , जो आदि अन्त में भी स्थिर रहने वाला । कभी नष्ट न होने वाले ऐसे तीनों लोकों को अपने वश में रखने वाले,
आदि, अनन्त, चर, अचर, निर्गुण, सगुण, सम्पूर्ण ब्राह्मण्ड के रचियता परम पवित्र परमेश्वर परब्रह्म। एक तू ही जिसमें यह सारी क्रियाऐं विधमान हैं, जिससे हर जीव प्राणीमात्र उत्पन्न हुआ है है मेरे भोलेनाथ है ! हे मेरे प्राणनाथ प्रभु आपका नाम लेने से दुष्ट से दुष्ट महापापी से महापापी घोर नरक में जाने वाले प्राणी मात्र को भी आपने दया करके अपने शरण में लिया हैं उन्हे अपने चरणों में वास दिया हैं । हे मेरे भोलेनाथ अपने नैनो से इतना प्यार बरसाऊँ आप प्यारे पर कि आपका अभिषेक कर सकूँ मुझे कभी जल की आवश्यकता ही ना पड़े। ऐसी कृपा करे अविनाशी मेरे प्यारे भगवान सदाशिव, परम दयालू देवों के देव महादेव, कालों के काल महाकाल, विष को धारण करने वाले, मृत्यु पर विजयीभवदाता , नीलकंण्ठ महादेव, गल में मुण्डमाला धारण करने वाले, ओढ़न मृगछाला, भोला बेल चढ़न वाले, भोला भूरी जटा वाले ,भोला तीन नेत्र वाले ,भोला यम काटन वाले, भोले दर्शन देने वाले, भोला बरसो जल धारा , जटा में गंगा विराजनमान, त्रिपुण्ड धारण किये हुए, जग से निराले, भक्तों के रखवाले, माता पार्वती के प्यारे, प्रभु ऐसे मेरे भोलेनाथ शिवशक्ति के रुप में दर्शन देने वाले आपका तेज इतना अधिक हैं कि आपके प्रकट होने पर आपके तेज , बल व प्रकाशवान ज्योति के सामने असंख्य कामदेव, असंख्य सूर्य व सकल ब्राह्मण्ड एक होने पर भी आपके सामने अर्थात् आपके समान तेज को प्राप्त नहीं कर पाते है, वे सभी आपके सामने लज्जित होते हैं । ब्रह्राा ,विष्णु तथा वेद_ पुराण भी आपके आदि अंत का पार नहीं पाये |
हे परब्रह्म सदाशिव सगुण रूप में आप भोलेनाथ हैं! आप सदैव अपने ही निराकार (शिव) रूप का ध्यान करते हैं | ब्रह्मा विष्णु की प्रार्थना पर आपने प्रलेय कर्ता के रूप में अपना सगुण रूप धारण किया हैं| ब्रह्मा विष्णु सनकादिक सभी देवी_देवता आपको प्रसन्न व अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए आपका निरन्तर ध्यान व यशगान करते हैं | हे निराकार शिव ! ब्रह्म विष्णु महेश यह तीनों एका ! यह तीनों आप ही के रूप हैं | आपने सभी भक्तों की रक्षा के निमित्त ही सगुण रूप में अवतार लिया हैं |
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