हे! प्रिये हम दोनों प्रेम में स्वाभाविक आकर्षण
से चलते हुए यथार्थ प्रेम के शिखर पर आ गए
यह हमारे दोनों के लिए एक प्रेममय प्रसन्नता है।
इसका कारण है कि हमने एक दूसरे को
समझ कर प्रत्येक प्रेम चेतना के स्तर पर
एक दूसरे को जागृत किया और
इस प्रेम जीवन यात्रा में जो वियोगऔर
पीड़ा का अनुभव हुआ उसको भी हमने प्रेम
की ऊंचाइयों को छूने के लिए उपयोग किया।
मैं तो अपने हृदय में इसके लिए आपके
प्रति गहरे भाव रखता हूं क्योंकि मेरे
आराध्य भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहां है
कि अंत समय में आप जिस भाव से
अपने प्राणों का त्याग करेंगे उसी भाव से
अगले जन्म को धारण करोगे इसलिए
मैं तो अगले जन्म में एकदम जागृत प्रेममय
होकर आपके इसी यथार्थ प्रेम की वजह
से आऊंगा, इसलिए हे! प्रिये आपके प्रति
मेरा एक गहरा श्रद्धा युक्त भाव है।।
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