शैल कहती है कि कल्लू ये तूने अच्छा नहीं किया
अब शैल और कल्लू की लड़ाई-झगड़े शुरू हो जाते हैं
शैल कहती है कि ये मत भूलों कि तुम आज जो कुछ भी हो मेरी बदौलत वर्ना रास्ते मे मारे मारे फिर रहे थे कोई पूछ नहीं रहा था अर्जुन भैया ने तुम्हें पनाह दी थी
और अपनी औकात देखो
मैंने ही अपनी सहेलियों से कहकर तुम्हें काम दिलाया था और आज जरा सा अपने मित्रों और सहेलियों को बुला लिया तो तुम्हें इतनी परेशानी हो गई
कल्लू कहने लगे कि बड़े चाचा के घर मे क्यु नहीं बुलाया था तुम्हें इन लोगों को
मैं तो मुन्नू के पापा से सब कहूँगा कल्लू गरजने लगे और उनकी ये बात सुनकर मुन्नू तो बहुत डर गया और बोला कि शैल ने हमे बुलाया था और पकौड़े चाय बनाई थी
क्रमशः

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