
लोग कितने सरल होते थे सबकी परवाह करते थे ,एक दूसरे की इज़्ज़त करते थे
पहले का जमाना कितना अच्छा था लोग लालची नहीं थे
संतुष्टि थी उनके मन मे
स्वाभिमानी थे
विश्वास पात्र थे
सज्जन थे
प्रेम की भाषा समझते थे
आपसी बैर भाव नहीं था
एक दूसरे की उन्नति को देखकर प्रसन्न होते थे
एक दूसरे के दुख सुख मे साथ देते थे
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