उफ्फ कितनी गर्मी थी
हवा मे भी कुछ नमी थी
आगे चौराहा था वहाँ पर एक महिला खड़ी थी
उसके हाथ मे एक डालिया थी उसमे सुगंधित फूल थे कुछ दूर पर भगवान कृष्ण का मन्दिर था और मंदिर खाली सा लग रहा था
मैं भी वहाँ पर अपनी मम्मी और दो बच्चों के साथ थी बच्चे छोटे थे और भूखे भी थे वो कह रहे थे कि मम्मी भूखे है हम
अब वहां चौराहे पर अफरा-तफरी मची हुई थी
गाड़ियां थी, रिक्शे दौड़ रहे थे साइकिलें भी थी
अब वहां पर कुछ चीजे खाने योग्य नहीं थी वे बच्चों को खिलाने से बच्चे बीमार हो जाते
अब हम लोग देखने लगे खोजने लगे कि बच्चों को क्या खिला दु
छोटा बच्चा रोने लगा
तभी फूल वाली महिला देख रही थी हम लोगों को बहुत दूर से वो समझ गई कि बच्चे भूखे हैं
वो हम लोगों के पास आई और बोली कि बांके बिहारी जी के मंदिर के पास मक्खन मिलता है जो बहुत स्वादिष्ट और शुद्ध है जाओ बच्चों को खिला दो और वहाँ फल की एक दुकान भी है
ये पूरियां और जलेबी बच्चे को मत खिलाना
अब हम लोग बांके बिहारी जी के मंदिर गए वहां पर ताजा सुगंधित मक्खन बिक रहा था और कुछ फल खरीद कर बच्चों को खिला दिए खुद भी खाए
और वापस बांके बिहारी जी को धन्यवाद दिया
जय बांके बिहारी जी
टिप्पणी करे