हवस की भूख अन्धी है,
वो दिया जलाना क्या जाने,
जिनके दिलों में आग भरी,
वो सूरज को क्यों पहचाने।
सोच जिनकी दूषित है,
वो भूल गये सब याराना,
जिनके मन भाव नहीं,
वो भगवान को क्या जाने।
हवस की भूख अन्धी है,
वो दिया जलाना क्या जाने,
जिनके दिलों में आग भरी,
वो सूरज को क्यों पहचाने।
सोच जिनकी दूषित है,
वो भूल गये सब याराना,
जिनके मन भाव नहीं,
वो भगवान को क्या जाने।
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