दूसरों की मुसीबतों को भी अपना समझो

दूसरों की मुसीबतों को देखते ही अक्सर लोग मुह मोड़ लेते हैं लेकिन कभी कभी उसी मुसीबत का सामना सबको करना पड़ता है

बड़ा बाजार कोलकाता मे एक बहुत बड़ी मार्केट थी कपड़े की

उसमे बहुत बड़े बड़े मारवाड़ी कपड़ा उद्योग चलाते थे मैं भी वहाँ जाती थी

बहुत अच्छे अच्छे मुल्य पर कपड़ा मिलता था

एक दिन मुझे पता चला कि उस मार्केट मे आग लग गई

मैंने सोंचा की शायद किसी ने लगा दी होगी

लेकिन बाद मे पता चला कि एक पुरानी दुकान मे बिजली का एक तार दो दिन से चिनगारी छोड़ रहा था वो रुक भी जाता था

उधर से लोग निकलते तो कह्ते की हमे क्या इनकी दुकान है वो समझे

अब एक दिन उसके दुकान की बिजली चली गई वो दुकानदार परेशान हो रहा था सबसे कह रहा था कि हमे एक तार देदो हमारी बिजली चली गई उसकी मदद किसी ने ना कि अब वो अपना माल निकाल कर गोदाम मे रख कर चला गया थोड़ा सा सामान उसका बचा था

अब तीन दिन के बाद उसी तार से अंदर ही अंदर आग लगती जा रही थी सभी के तार अचानक से जलने लगे एक बड़ा विस्फोट हुआ और आग पूरे मार्केट मे फैल गई

बहुत नुकसान हुआ सबका

बाद मे पता चला कि किसी ने ध्यान नहीं दिया उस तार का

अगर कहीं पर भी कोई समस्या है तो अगर आप देख रहे हों तो उसको सुलझाने की चेष्टा करो वर्ना कहीं आप भी उसकी चपेट मे ना आ जाओ

दूसरे की समस्या को अपनी समस्या समझो

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