देव दासी भाग 508

कामिनी एक दम पागल हो चुकी थी

अब अगले दिन ही उसके पिता और भाई वीर सिंह के यहां रिश्ता लेकर जाने वाले थे

कामिनी की भाभियों ने जाने की पूरी तैयारियां की थी

मिठाइयाँ आ चुकी थी

आखिर वे लोग इतने अमीर ठाकुर थे और वीर सिंह उनसे भी बड़े ठाकुर वो भी इकलौता बेटा था

कामिनी मन ही मन प्रार्थना कर रही थी

वो भी अपने भाइयों को वीर सिंह के यहां जाते देख रही थी o

कामिनी के पिता और वीर सिंह के पिता दोनों दोस्त थे वे एक साथ ही काम करते थे दोनो एक दूसरे की बहुत मदद करते थे

जब वीर सिंह के पिता और भाई वीर सिंह के यहां रिश्ता लेकर गए तो वीर सिंह के पिता बहुत खुश हुए वे कामिनी और उसके पूरे परिवार को जानते थे

क्रमशः

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