दीपेन्द्र क्या करता अब तो उसके पास कोई चारा ही नहीं था वो आदमी 6 थे और दीपेन्द्र अकेला था वो सब वहीँ ही आ रहे थे
उस लड़की ने कहा कि मुझे मरने दो तुम कहीं छुप जाओ जल्दी से
दीपेन्द्र ने कहा कि मैं कोई कायर नहीं हू मैं एक मर्द हू तुम्हारी मदद करूंगा और वो उस लड़की के हाथ खोलने लगता है परंतु असफल हो जाता है वो आदमी बाद कुछ ही दूरी पर थे
पानी बरस रहा था दीपेन्द्र ने कहा कि अगर आज तुम्हारी मृत्यु नहीं होनी होगी तो आज कोई ना कोई रास्ता निकाल ही लूँगा मैं किस्मत भी कोई चीज होती है लड़की कहती हैं कि मैं तुम्हें मरने नहीं दूंगी तुम निर्दोष हो मेरी चिंता मत करो तुम जाओ जाओ जाओ
दीपेन्द्र पत्थर का बुत बनकर वहीँ खड़ा हो गया तभी एक आदमी कहता है कि यार आज तो बहुत मज़ा आएगा
शराब और वो सुंदर लड़की आज तो सबकुछ है यार ऊपर से सुहाना मौसम
क्रमशः

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