वीर सिंह के पिता जी भी कामिनी और उसके घर वालों को जानते थे कामिनी उन्हें बहुत अच्छी लगती थी और वे कभी कभी कामिनी के घर जाते थे तो कभी कभी कामिनी उनके लिए नाश्ते का प्रबंध कर देती थी परंतु वे ये नहीं जानते थे कि कामिनी के घर वाले वीर सिंह के यहां रिश्ता लेकर आएंगे
वीर सिंह की माँ भी सहमत हो जाती है
अब मिठाइयों की रस्म पूरी की जाती है वीर सिंह को पता ही नहीं था कि उनके पिता कामिनी से विवाह की बात पक्की कर सकते हैं खैर वीर सिंह भी अपने पिता का विरोध नहीं कर सकते थे वे अपने पिता का बहुत सम्मान करते थे
अब सब कहते हैं कि पंडित जी से दिन पूछ कर बाकी की रस्मों को पूरा किया जाए
वीर सिंह से भी राय ली जाए
पिता जी ने कहा कि वीर की बात ना करो वो मुझपर बहुत विश्वास करता है मैं जैसा कहूँगा वो वहीँ ही करेगा क्रमशः

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