धूप के आदी हो गये, छाया हमें भरमाती नहीं,सुख की बेला खो गयी,चाँदनी घर आती नहीं।अँधेरे रास आने लगे,अमावस अब डराती नहीं,खुले जख्म हँसते है,किस्से कहानी बनाती नहीं।।भरी बारिश पत्ते पीले लगे,हरियाली भाती नहीं,लम्हातों ने देखा मुझे,यादें अब मिलने आती नहीं।बदली जमाने की राह,मोड़ पर नज़र जाती नहीं, खोए खुद में इस कदर,सूरतें

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