बारिश


जान जान पहचान अधूरी,मिलना हुआ बहाना,
सरल परीक्षा है रिश्तों की,मुश्किल है समझाना।
जिसका जैसा किरदार दिखा उससे वैसी बातें,
दिल ने देखा झूठी महफिल, मन हंसा मतवाला।।

सच आया दर पे तुम्हारे,तुमने उसे बिसराया,
चाहत का कर अपमान,झूठ भर आँख बिठाया।
उजड़े घर की छत कमजोर,टूटी हैं दीवारें,
रिस्ते जख्म बने नासुरी,झूठा जगत फसाना।।

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