मातु पिता जड़ जीवन बेला।तरू पल्लव सिंचित तन मेरा।।
नियम बद्ध ऋतुओं से बाँधा।सत्कर्मों के फलों से लादा।।१
जग जननी माँ जीवन पाया।धूप जले तो देती छाया।
पर उपकार जन करि भलाई।शुद्ध विचार संग प्रभुताई।।२
स्वाभिमान का अर्थ बताया।मर्यादा का पाठ पढ़ाया।
बन कर ताकत मुझे सम्भाला।रीत-रिवाज रंग में ढाला।।३
गुरु सम ज्ञानी सूर्य समाना।काँधे बैठ देखा जमाना।
कष्ट झेलकर मुझको पाला।अनुशासित जीवन में ढाला।।४
सदाबहारी फूल बनाया। समभाव का काजल लगाया।
जीवन की नीरसता काटी।ज्ञान लेख पकड़ाई पाटी।।५
भाई बहन एकहि समाना। हर मुश्किल हल करै निदाना।
जन्म जन्म का उनसे नाता।पितु दिवाकर चाँद सम माता।।६
कर्मयोग का भेद बताया।कर्म प्रधान तत्व सिखाया।
प्रेम तत्व जीवन का गहना।प्रभु प्रेम धारा सम बहना।।७
मातु पिता ईश्वर सम आली।पिता से मिली जीवन लाली।।
मातु पिता हैं उर में ऐसे।सीप बसै मन मोती जैसे।।८
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