मोह जीवन को नष्ट कर देता है

जीवन जीना कोई सरल नहीं है जब से जीवन शुरू होता है माया मोह भी उसी समय से लग जाता है ये माया मोह ही सारे फसाद की जड़ होती है

यही माया है जो जीने नहीं देती

क्या अपना है और कौन पराया है ये समझने ही नहीं देती

इनके सारे अपने ही जब ठोकर लगाते हैं

तब सब रोते हुए कहते हैं कि ये मायाजाल है

और फिर अगले समय खुद ही अपने आपको फंसा डालते हैं

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