नहीं रूपा मत सत्य कह रहा हू ये रघु ने ही दिया है
पी लो जल और खाना खा लो
रूपा कहती हैं कि नहीं मेरा व्रत खण्डित हो जाएगा मैंने बहुत श्रद्धा से पूरा दिन व्रत किया है
प्रकाश कहते है कि चलो मैं दिखाता हू तुम्हें कि मैं सत्य कह रहा हू तुम मेरा विश्वास मत करना आओ मेरे साथ चलो
नहीं मैने ये नहीं कहा ठीक है मैं जल पी लेती हू और खाना भी खा लेती हू ठीक है मुझे आप पर भरोसा है
और रूपा जल पीने लगती है तभी सुनीता आ जाती है और कहती है हाए राम घोर अनर्थ मै ये क्या देख रही हूँ तुम मेरे पति के हाथ से जल लेकर पी रही हो रूपा आज करवा चौथ का दिन है पति के हाथ का जल पीते हैं आज और रघु तो तुमसे नफरत करता है क्रमशः

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