
कशमकश है जिंदगी यारों, झूठ है या सच इसमे भी संदेह है लोग आते हैं और लोग जाते हैं ये कैसी जीवन की रैली है, कुछ सम्भल गए, कुछ बदल गए कुछ हमें बदल कर चले गए
सुबह हुई फिर से शुरू हो गई है कशमकश, रोजी रोटी की तलाश मे और बहुत कुछ पाने की चाह मे जैसे खुशिया बिखर सी गई
बेदर्द है कुछ लोग जो अपने है, अपने तो अब ऐसे लुप्त हुए जैसे कि वे लगते थे कि वो कभी सपने थे
कुछ बहुत सयाने हो चले, कुछ बेगाने हो चले और कुछ मेरे लिए अफ़साने हो गए
हमे तो बस चलते जाना हैं बस चलते जाना है,गिर गिर कर संभालते जाना हैं अपने आपको ये समझा देना है कि सब भ्रम है बस हमें चलते जाना है
टिप्पणी करे