अनुष्ठान और बकरे की किस्मत

बच्चे का जन्म हुआ 8 साल के बाद घर मे खुशिया ही खुशियां थी, सब बहुत प्रसन्न थे

एक मन्नत मांगी थी जो पूरी हो गई अब उस मन्नत को पूरा करने का समय हो गया था

एक काले रंग के बकरे की बलि देनी थी उसका ताजा खून कुलदेवी को अर्पण करना होगा आखिर उनकी चौखट पर सिर रखा था

सब रिश्तेदारों को न्योता दिया जाता है और एक बड़ा सा बकरा काले रंग का खरीद लिया जाता है

सब लोग बकरे को देखते ही खुश हो चुके की आज देवी माँ का खूब प्रसाद बनेगा

अब बकरे को सारे दिन खूब स्वागत किया जाता है उसको मनपसंद चीजे खिलाई जाती है बकरा बहुत ही खुश होता है

अब रात मे बकरे के पैरों की मालिश होती है बकरे को तख्ते पर बांध दिया जाता है और दो चार लोग ताक कर बैठे होते हैं कि कहीं रस्सी खुल गई और कहीं उनका प्रसाद भाग ना जाए अखिर अनुष्ठान पूरा करना है

सुबह होती है कुलदेवी का व्रत रखा जाता है जब बकरा कुलदेवी मे अर्पण हो जाएगा तभी अन्न का टुकड़ा प्रसाद के साथ खाएंगे

अब बकरे को नहलाया जाता है सुबह से ही 4 बजे

उसके टीका लगाया जाता है

और एक टैक्सी मे प्यार से उसे बैठाया जाता है बकरा रोने लगता है सब कहते हैं कि कहे रो रहा है ये

एक आदमी कहता है कि ये खिड़की के पास मुह करके बैठेगा अब उसे खिड़की के पास मुह करके बैठाया जाता है टैक्सी में भूसे की तरह सब भर जाते हैं बकरा खिड़की के पास आराम से बैठा हुआ है

अब वो छोटा बच्चा भीड़ मे रोने लगता है रोता ही रहता है चुप ही नहीं होता

सब देखने लगते हैं कि किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा

अब रास्ते मे ही छोटे बच्चे को उल्टियां शुरू हो जाती है और बंद ही नहीं हो रही वो 1 महीने का बच्चा था

अब कुलदेवी का मंदिर ज्यादा दूर नहीं था

मंदिर पहुंच जाते हैं बकरा भी उतारा जाता है

पूजा पाठ होने लगती है बच्चे की माँ चिल्ला कर कहती है हाए बच्चा कुछ बोल नहीं रहा है क्या हुआ इसको हाए मेरी मैया क्या गलती हुई मुझसे

मैंने तो अपना अनुष्ठान पूरा किया अब बलि देनी बाकी थी

पुजारी जी ने कहा कि ये बच्चा बेहोश हो गया है इसे अस्पताल ले जाओ जल्दी से

बच्चे को बकरे के पास ले जाते हैं बकरा बच्चे को प्यार करने लगता

तभी सब देखते है कि बच्चा उस बकरे को देख रहा है

अब बकरे की बलि देने के लिए ले जाते हैं तभी बच्चा फिर रोने लगता है

लेकिन बच्चे की मां कहती है नहीं ये बलि अब नहीं होगी कुलदेवी की इच्छा नहीं है

अब सब खाने के लिए खड़े हुए है कह रहे है कि हमे क्यों बुलाया फिर लेकिन माँ कहती हैं कि नहीं अशुभ संकेत है ये बच्चा बीमार पड़ गया है

तो इस बकरे का क्या होगा अब

बच्चे की माँ ने कहा कि ये हमारे खेत मे रहेगा ये माता रानी के ऊपर अर्पण हो गया जीते जी और देखो मेरा बच्चा भी होश मे आ गया

और वो उस बकरे को फिर से लाकर खेत मे छुड़वा देती है बकरा घास खाता और उसके खेत मे खेलता 🌹🌹🌹

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