जिन्दगी के दर्द चुपचाप न झेलो
जिन्दगी जब रुलाए रो लो
लोग रोने पर कमजोर कहेंगें तुमको
कहने दो पर रोकर तुम दृढ़ हो लो
न रोको अपने आँसू तकिया भिगोने के लिए
न ढको अपने जख्म नासूर होने के लिए
रोक आँसू मत बनो मजबूत दिखाने के लिए
किसने कहा आँसू होते हैं छिपाने के लिए
बस उनके सामने मत बहाना
जिंनका काम है बस खिल्ली उड़ाना
दूसरों के आँसूओं का फायदा उठा
अपने मनसूबे पूरे करना कराना
महफ़िल में भी बह कर आँसू
अपनों का ही पता देंगे
अपने तो चुप ही करा लेंगे
ढाढ़स बंधा दर्द से निकलने का हौसला देंगे
दर्द में लिपटे आँसुओं को बहने दो
मत होने दो तेज़ाब
आँसू को आँसू ही रहने दो
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