लोभ की भी एक सीमा है

लोभी इंसान का कभी पेट भरा नहीं किसी भी वस्तु से

उसे जितना मिलता है उससे और भी अधिक पाने की चाह रखता है और वो हमेशा ही दुखी रहता है इस बात पर की उसके पास मुझसे ज्यादा है और मैं उससे और भी ज्यादा चाहता हू

बैंक मे पैसा इकट्टा कर लेता है खूब सम्पत्तियों का मालिक अपने आपको समझने लगता है

और बाद मे जब बूढ़ा हो जाता है तब वो सम्पत्ति उसके काम की नहीं होती उसके बच्चे और कई लोग उसके शत्रु बन जाते हैं आप लोगों ने सुना ही होगा कि सम्पत्ति के पीछे बेटे ने बाप का खून कर दिया

या चोरी हो जाती है या लूट पात हो जाती है

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