संसार का नागपाश

रहना ही है इस संसार मे क्योंकि ये एक नागपाश की तरह ही है

इसमें लोग बंध जाते हैं रिश्तों मे

अपनी तकदीर के सहारे भी बिता देते हैं ये जीवन

अरे इस जीवन को कुछ लोग ही समझ पाते हैं

लोग समझते हुए भी उस पर गौर नहीं करते

किसी के जुदा होने पर वे उसके लिए आंसू बहाते रहते हैं या फिर सारा जीवन अपना एकांकी कर डालते है उसके लिए

ये संसार का नागपाश ही है इसको लोग अपने गले मे खुद ही डाल दिया करते है

इस नागपाश को पहन कर जीवन भर घूमते रहते हैं

साँस कैसे मिलेगी जो कुछ सांसे मिली है उन्हें भी प्यार से महसूस नहीं करते हैं क्योंकि उन्होंने नागपाश खुद ही अपने गले मे डाल लिया है

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