देव दासी भाग 512

और वे लोग कामिनी की गोद भराई के लिए आभूषणों और तैयारियां शुरू कर देते हैं

वीर सिंह भी कुछ नहीं बोलते हैं और शादी के लिए मान जाते हैं अब अंगुठी मंगवाई जाती है एक जाने माने सुनार से, अखिरकार कामिनी उनकी इकलौती बहू होगी

और कपड़ों के लिए एक जानी मानी दुकान से कीमती साड़ियां और भी जरूरी कपड़े मंगवा लेते है

अंगुठी हीरे की थी जो बहुत ही सुंदर और कीमती थी सोने का हार, कंगन और कान के सुंदर से

सारी वस्तुएं तीन दिन के अंदर ही आ चुकी थी

कामिनी के घर की सफाई शुरू हो जाती है सगाई मे काफी लोग आने वाले थे ठाकुरों की बिरादरी थी

उनके शौक भी अजीब थे

शराब की बोतलें, मांस की व्यवस्था भी करनी थी

मिठाइयाँ, खाने की व्यवस्था करने के लिए बड़े बड़े हलवाई बुलाने बड़े भैया जाते है

सभी के लिए कपड़ों की व्यवस्था भी करनी थी

बहुत कुछ करना था वीर सिंह भी आने वाले थे

कामिनी भी बहुत खुश थी

तीन दिनों के बाद सगाई होनी थी क्रमशः

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