किस चीज की परवाह करते हो उसकी जो चली गई है या उस वस्तु की जो चली जानी है
परवाह उसकी करनी है जिन्होंने आपको पालने के लिए अपने सुखों को कुछ ना समझा
ये जगत हमें कुछ नहीं देता हम ये सोंच कर भूल करते हैं कि ये सब मेरा है और हम उसकी परवाह करने लगते है
एक अज्ञात भय भी हमे हो जाता है कि ये वस्तु कहीं हमसे अलग ना हो जाए, चली ना जाय
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