मुक्ति सम्भव है

घिरे हुए हैं एक बड़े समुद के बीच जिसे माया मोह कहते हैं इससे पार कर लिया तो समझो मुक्ति

अक्सर हमे उन्हीं लोगों का ख्याल आता है जो हमेशा हमेशा के लिये हमेशा दूर हो जाते हैं वो चाहे हमारे लिए कोई योगदान करे या ना करें

लेकिन मुक्ति तभी सम्भव है जब हम लोग जो लोग हमारे पास है उनका ही ख्याल करें और उनकी भलाई और सेवा करे

हम अक्सर ऐसी वस्तुओं को पाने की इच्छा करते हैं जो हमे प्राप्त नहीं हो सकती उन वस्तुओं की कल्पना करने से अच्छा है जो आसानी से प्राप्त हो जाए उसके बारे मे सोंच सकते हैं

जो वस्तु हमें नहीं मिलती है उसकी इच्छा को मन मे पाले रहने से मुक्ति नहीं है

मुक्ति उसकी होती है जो तृप्त रहता है

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