सबकुछ पाने की चाह में कभी कभी जो अपने पास होता है वो भी चला जाता है

बहुत कुछ चाहिए, और चाहिए एक बहुत बड़ा घर चाहिए, एक सुन्दर कमाने वाली पत्नी चाहिए, बच्चे भी अच्छे चाहिए, पैसा भी खूब सारा चाहिए, सुख सुविधाओं का अम्बार भी चाहिए, खूब अच्छा अच्छा भोजन और खूब ऐश भी चाहिए, जीवनसाथी के साथ रंगरेलियां भी चाहिए और भी ना जाने क्या क्या

अपनी मेहनत, या छीन कर पाया और कुछ दिन ऐश किया किसी का दिल तोड़ दिया किसी को बैचैन किया

अंत मे जब जी भर गया तो साधु बन गए मंदिरों मे चक्कर लगाने लगे शांति नहीं है क्योंकि उन्हें एहसास हो चुका है कि उन्होंने वो सब खो दिया जो सबसे बेहतर था

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