कासिद के आते आते खत एक और लिखूं
हम जानते हैं क्या वो लिखेंगे जवाब में
श्री हरि शरणम
पत्र मिला है कुशल क्षेम की खबर सुहानी लगती है
आईना की ओर निहारे। पानी पानी लगती है
जाने क्या-क्या घूम गया मन
थोड़े समय चक्र के अंदर
परियों वाली कथा कहानी
पंछी कलरव मध्य समंदर
शाम ढले सूरज की लाली
जानी-मानी लगती है
पत्र मिला है कुशल क्षेम की खबर सुहानी लगती है
भंवरे गुंजित चमन भरा है
फूलों की क्यारी क्या कहती
कल कल धुनि से नदिया बोले
अविरल गति से मैं बहती
यही प्यार सृष्टि के कण कण
प्रकृति ही रानी लगती है
पत्र मिला है कुशल क्षेम की खबर सुहानी लगती है
उषा बेला से ही पंछी
पेड़ पेड़ पर चिल्लाते हैं
वह चल चुके रखो कुछ धीरज
बहुत शीघ्र ही आते हैं
शुभम शीघ्रम जीवन नश्वर
गई जवानी लगती है
पत्र मिला है कुशल क्षेम की खबर सुहानी लगती है
पर्वत के नीचे घाटी में
भोजन हित सारस का जोड़ा
फिर आकाश नापना होगा
समझाता यह समय है थोड़ा
यही नियम है वसुंधरा का
सत्य कहानी लगती है
पत्र मिला है कुशल क्षेम की खबर सुहानी लगती है
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