पतंग की तरह सबकी डोर बंधी होती है ये कब टूट जाए और पतंग निर्जीव हो जाए
हमे सरल तरीके से दुनिया मे रहना चाहिए
खुश रहना चाहिए
स्वतंत्र रहना चाहिए
दूर भी रहना चाहिए
ज्यादा पास किसी के पास नहीं आना चाहिए
पतंग की तरह सबकी डोर बंधी होती है ये कब टूट जाए और पतंग निर्जीव हो जाए
हमे सरल तरीके से दुनिया मे रहना चाहिए
खुश रहना चाहिए
स्वतंत्र रहना चाहिए
दूर भी रहना चाहिए
ज्यादा पास किसी के पास नहीं आना चाहिए
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