कोई भी परिवार का सदस्य अगर शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर है बूढ़ा है लाचार है तो हमें उन लोगों को सहारा देना चाहिए क्या पता आज जो हम लोगों के पास है वो इनकी ही किस्मत का हो
माना कि हम लोग शरीर और दिमाग से ठीक है लेकिन हमे इनके साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए समय का कोई भरोसा नहीं, क्या पता समय की ऐसी मार ना पड़ जाए जो हम लोग इनसे भी बदतर हो जाए
समय बहुत ही बलवान होता है इन लोगों की भी अपनी किस्मत होती है ये भी अपनी किस्मत का खाते हैं
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